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हाईकोर्ट का कड़ा फैसला: अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को राहत, याचिकाकर्ताओं पर 25 हजार का जुर्माना

➤ अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अवमानना नोटिस रद्द
➤ कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन साबित नहीं हुआ, याचिकाकर्ताओं पर 25 हजार रुपये का जुर्माना
➤ सात दिन में चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा होगी जुर्माने की राशि


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी सिविल जेल के अवमानना कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया है। अदालत को विश्वविद्यालय की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट के किसी आदेश का उल्लंघन किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता के साथ रजिस्ट्रार खुद भी अदालत में उपस्थित हुए और संबंधित दस्तावेज पेश किए। इन दस्तावेजों के आधार पर यह सामने आया कि विश्वविद्यालय ने अदालत के निर्देशों का समय-समय पर पूरी तरह पालन किया था। इसके बाद पीठ ने रजिस्ट्रार के खिलाफ जारी सिविल जेल के कारण बताओ नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

हालांकि, इसके बाद मामला याचिकाकर्ताओं के लिए मुश्किल में बदल गया। नोटिस रद्द होने के तुरंत बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत से अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी। इस पर हाईकोर्ट ने मामले को बिना वजह लंबा खींचने और इस स्तर पर याचिका वापस लेने की कोशिश पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने 25,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिकाकर्ताओं को अर्जी वापस लेने की अनुमति दी।

रजिस्ट्रार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई में नहीं मिला उल्लंघन का सबूत

मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। रजिस्ट्रार के खिलाफ कोर्ट के आदेशों की कथित अवहेलना को लेकर सिविल जेल का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

सुनवाई के दौरान अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी की ओर से अदालत के समक्ष संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। रजिस्ट्रार भी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए।

दस्तावेजों के परीक्षण के बाद पीठ के सामने यह स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया था। कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन से संबंधित कोई ठोस सबूत नहीं मिलने के बाद पीठ ने रजिस्ट्रार को जारी कारण बताओ नोटिस को निरस्त कर दिया।

इस आदेश से रजिस्ट्रार को अवमानना मामले में बड़ी राहत मिली।

नोटिस रद्द होते ही याचिका वापस लेने की मांग

रजिस्ट्रार के खिलाफ जारी अवमानना नोटिस निरस्त होने के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से उनके वकील ने अदालत से अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी।

लेकिन अदालत ने इस मांग को सामान्य तरीके से स्वीकार नहीं किया। पीठ ने मामले की प्रकृति और अब तक की कार्यवाही को देखते हुए कहा कि बिना किसी जुर्माने के याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने मामले को अनावश्यक रूप से आगे खींचे जाने के पहलू को गंभीरता से लिया और याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया।

25 हजार रुपये जुर्माने के साथ अर्जी वापस लेने की अनुमति

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ अर्जी वापस लेने की अनुमति दी। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में नरमी दिखाते हुए याचिकाकर्ताओं को अर्जी वापस लेने का अवसर दिया, लेकिन इसके लिए जुर्माना जमा करना अनिवार्य किया।

अदालत ने निर्देश दिया कि 25,000 रुपये की जुर्माने की राशि सात दिनों के भीतर चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा कराई जाए।

इस निर्देश के साथ अदालत ने संबंधित आवेदन का निपटारा कर दिया।

कोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर स्पष्ट हुआ रुख

इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश से यह भी स्पष्ट हुआ कि अदालत के निर्देशों के पालन से जुड़े मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य की अहम भूमिका होती है। रजिस्ट्रार के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी होने के बावजूद जब विश्वविद्यालय की ओर से कोर्ट के आदेशों के अनुपालन से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए, तो अदालत ने उनका परीक्षण किया।

उल्लंघन का प्रमाण नहीं मिलने पर अवमानना की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के बजाय नोटिस ही निरस्त कर दिया गया। इससे रजिस्ट्रार को तत्काल राहत मिली।

वहीं, दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं की ओर से अर्जी वापस लेने की मांग पर अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जुर्माना लगाया। इस तरह एक ही कार्यवाही में जहां रजिस्ट्रार को अवमानना नोटिस से राहत मिली, वहीं याचिकाकर्ताओं को 25 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ा।

सात दिन में जमा करनी होगी जुर्माने की राशि

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 25 हजार रुपये की जुर्माना राशि सात दिनों के भीतर चीफ जस्टिस डिजास्टर रिलीफ फंड में जमा करनी होगी। इसके बाद अर्जी वापस लेने की अनुमति के साथ संबंधित आवेदन का निपटारा कर दिया गया।

अदालत के इस फैसले से अवमानना मामले में रजिस्ट्रार के खिलाफ जारी नोटिस समाप्त हो गया है, जबकि याचिकाकर्ताओं को अदालत के निर्देश के अनुसार जुर्माना जमा करना होगा।